ॐ जय सूर्य देवा, स्वामी जय सूर्य देवा। तेज प्रताप महा जग में, तुम ही जगदेवा॥ सहस्र किरण तुम्हारे, नीरज करत प्रकाश। चारों वेद तुमसे, होत सबका उद्देश॥ रवि वाहन तुम्हारा, सात अश्व साजे। चारण चक्र धारी, दिवस राति विराजे॥ नाम जपे जो नर, तुम्हारा हर कष्ट मिटे। रोग शोक दूर हो, मंगल फल चित्ते॥ ॐ जय सूर्य देवा, स्वामी जय सूर्य देवा। तेज प्रताप महा जग में, तुम ही जगदेवा॥
॥ इति ॥
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