🪔

Aartidham

Aartis · Chalisas · Mantras

Shiv

Aarti · Shiv

जयति जयति जग-निवास

जयति जयति जग-निवास,
शंकर सुखकारी॥

अजर अमर अज अरूप,
सत चित आनन्दरूप।
व्यापक ब्रह्मस्वरूप,
भव! भव-भय-हारी॥ जयति जयति...॥

शोभित बिधुबाल भाल,
सुरसरिमय जटाजाल।
तीन नयन अति विशाल,
मदन-दहन-कारी॥ जयति जयति...॥

भक्तहेतु धरत शूल,
करत कठिन शूल फूल।
हियकी सब हरत हूल,
अचल शान्तिकारी॥ जयति जयति...॥

अमल अरुण चरण कमल,
सफल करत काम सकल।
भक्ति-मुक्ति देत विमल,
माया-भ्रम-टारी॥ जयति जयति...॥

कार्तिकेययुत गणेश,
हिमतनया सह महेश।
राजत कैलास-देश,
अकल कलाधारी॥ जयति जयति...॥

भूषण तन भूति ब्याल,
मुण्डमाल कर कपाल।
सिंह-चर्म हस्ति खाल,
डमरू कर धारी॥ जयति जयति...॥

अशरण जन नित्य शरण,
आशुतोष आर्तिहरण।
सब बिधि कल्याण-करण,
जय जय त्रिपुरारी॥
॥ इति ॥

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