॥ श्री शनि चालीसा ॥ जय जय श्री शनिदेव, जय जय श्री शनिदेव। सूर्य पुत्र प्रभु महाराज, तेरे भक्त होय सहाय॥ काले वस्त्र धारी, काली धवंस करी। नील स्वरूप धारी, निर्दोष भक्त उबारी॥ तिलक भाल सोहै, माथे तेल लगावै। शनि भक्तन को, संकट दूर भगावै॥ शनि शनि शनि रटै जो नर, ताको संकट कटै बल। शनि देव की शरण में, जो जन आवै॥ शनि चालीसा पठै जो जन, ताको दुःख निवारै। शनि देव कृपा करै, सर्व सुख दायिनी॥
॥ इति ॥
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