॥ श्री संतोषी माता चालीसा ॥
जय संतोषी माता, जय संतोषी माता। सुख संतोष करनी, भक्तन की माता॥
तुम ही दैत्य दाहिनी, तुम ही दुःख नाशिनी। भक्तन के संकट हरणी, सुख सौभाग्य दायिनी॥
गुरुवार के दिन तेरी पूजा, करत भक्त प्रभु तेरी सेवा। गुड़ और चने का भोग लगै, संतोषी माता कृपा करै॥
जो जन संतोषी चालीसा पठै, ताको सुख सौभाग्य प्राप्त होय। संकट मिटै सब दुःख भागै, संतोषी माता कृपा करै॥
॥ इति ॥
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