ॐ जय श्री रामादे, स्वामी जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेनादे॥ ॐ जय श्री रामादे॥ रूप मनोहर जिसका, घोड़े असवारी। कर में सोहे भाला, मुक्तामणि धारी॥ ॐ जय श्री रामादे॥ विष्णु रूप तुम स्वामी, कलियुग अवतारी। सुरनर मुनिजन ध्यावे, जावे बलिहारी॥ ॐ जय श्री रामादे॥ दुःख दलजी का, तुमने पल भर में टारा। सरजीवन भाण को, तुमने कर डारा॥ ॐ जय श्री रामादे॥ नाव सेठ की तारी, दानव को मारा। पल में कीना तुमने, सरवर को खारा॥
॥ इति ॥
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