॥ श्री लक्ष्मी चालीसा ॥
जय लक्ष्मी रमा, जय लक्ष्मी रमा। भक्तन के सुख सौभाग्य की दाता॥
कमल पुत्री जलधि सुता, हरि प्रिय पद्मिनी। जग माता जग कारिणी, जग दाता जग धारिणी॥
तुम पार्वती तुम महारानी, तुम सावित्री तुम जग माता। तुम ही देवी तुम ही दानी, तुम ही शक्ति तुम ही ग्याना॥
जो जो जन तुमको ध्यावै, ताको दुःख निवारै। लक्ष्मी जी तुम्हरे आगे, जो नर सदा जपै॥
॥ इति ॥
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