🪔

Aartidham

Aartis · Chalisas · Mantras

Krishna

Aarti · Krishna

आरति करत यसोदा प्रमुदित

आरति करत यसोदा प्रमुदित,
फूली अङ्ग न मात।
बल-बल कहि दुलरावत,
आनन्द मगन भई पुलकात॥

सुबरन-थार रत्न-दीपावलि,
चित्रित घृत-भीनी बात।
कल सिन्दूर दूब दधि,
अच्छत तिलक करत बहु भाँत॥

अन्न चतुर्विध बिबिध भोग,
दुन्दुभि बाजत बहु जात।
नाचत गोप कुम्कुमा छिरकत,
देत अखिल नगदात॥

बरसत कुसुम निकर-सुर-नर-मुनि,
व्रजजुवती मुसकात।
कृष्णदास-प्रभु गिरधर को,
मुख निरख लजत ससि-काँत॥
॥ इति ॥

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