॥ श्री काली चालीसा ॥ जय काली माता, जय काली माता। दुष्ट दानव नाशिनी, जगता की माता॥ काले बसन रक्त नयन, रक्त जिह्वा द्वार। रक्त माला गल सोहै, हाथ में खड्ग सुंदर॥ दक्षिणे कर मस्तके, खप्वांक सुंदर। बाम कर मुण्ड सुंदर, रक्त भरे जूठा॥ तुम ही शक्ति तुम ही काली, तुम ही माया अघ हारिणी। भक्तन के दुःख हरणी, दुष्ट संहारिणी॥ जो जन काली चालीसा पठै, ताको संकट दूर हो जावै। काली माता कृपा करै, सर्व सुख दायिनी॥
॥ इति ॥
दीप जलाने के लिए स्पर्श करें



