ॐ जय काली माता, मैया जय काली माता। सतकी सेवक जन के, सुख सम्पत्ति दाता॥ महिमा तेरी न्यारी, जग में सब जानें। दुष्ट दानव जगत में, माँ तुम ही मारें॥ माँ काली दुर्गा रूप, निरंजनी कहलाई। दैत्यन के संहारिणी, शुभ मंगल दिखलाई॥ खड्ग खप्पर धारिणी, वाहन सिंह साजे। मुण्डमाला गल में, दुर्गा माँ विराजे॥ माँ काली की आरती, जो कोई नर गावे। मनवांछित फल पावे, महिमा गुण गावे॥ ॐ जय काली माता, मैया जय काली माता। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
॥ इति ॥
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