मंगल मूरति मारुति नंदन। सकल अमंगल मूल निकंदन॥ पवनतनय संतन हितकारी। हृदय बिराजत अवध बिहारी॥ मंगल मूरति मारुति नंदन॥ मातु पिता गुरु गनपति सारद। सिवा समेत सम्भु सुक नारद॥ मंगल मूरति मारुति नंदन॥ चारि श्रुति गुर्जर धेनु दुहानी। राम कथा रुचिर कल्पित पानी॥ मंगल मूरति मारुति नंदन॥ रामायण जो नित प्रति गावै। सो नर सकल परम पद पावै॥ मंगल मूरति मारुति नंदन॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ मंगल मूरति मारुति नंदन॥ मंगल मूरति मारुति नंदन। सकल अमंगल मूल निकंदन॥
॥ इति ॥
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