जय गंगा मैया, मैया जय गंगा मैया। पाप हरो, कल्याण करो, सुख सम्पत्ति दो॥ हर की जटा से निकली, त्रिवेणी संग मिली। भक्तन के मन को, माँ तू शीतल की॥ धोती जग के पाप, हरती अघ किल्विष। माँ गंगे नमो नमः, मिटे सब दुःख विष॥ गंगा आरती जो गावे, मन इच्छा फल पावे। तीर्थराज तू माँ, मुक्ति मोक्ष दिलावे॥ जय गंगा मैया, मैया जय गंगा मैया। पाप हरो, कल्याण करो, सुख सम्पत्ति दो॥
॥ इति ॥
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