जय अम्बे जय अम्बे जय श्यामा। मंगल मांगल तुम हौ श्यामा॥
नमो नमो जगदम्बे जय दुर्गे खागी वाहिनी। सिंह सवारी महारानी त्रिपुर सुंदरी जग तारिणी॥
तुम ही हौ दैत्य दाहिनी, तुम ही दुख दाहिनी। भक्तन के दुख हरणी, सुख सौभाग्य दायिनी॥
कर में खड्ग कुठार त्रिशूल, जन के कष्ट निवारिणी। तुम ही शक्ति तुम ही काली, तुम ही माया अघ हारिणी॥
॥ इति ॥
दीप जलाने के लिए स्पर्श करें


