जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौर देवी, कृत सेवा॥ जय भैरव...॥ तुम्हीं पाप उद्धारक, दुख-सागर तारक। विश्वनाथ के गण तुम, त्रिभुवन के पालक॥ जय भैरव...॥ वाहन श्वान बिराजत, कर त्रिशूल धारी। कठिन कराल दंत हैं, मस्तक चंद्र भारी॥ जय भैरव...॥ नगर कोतवाल कहावै, कोई न पैसारै। सब देवन को दयालु, संकट तुम टारै॥ जय भैरव...॥ तुम बिन देव न दूजा, त्राहि-त्राहि जग तेरा। भूत पिशाच निकट नहीं आवैं, नित प्रति करत बसेरा॥ जय भैरव...॥ बटुक भैरव की आरती, जो कोई नर गावे। कहत प्रेम आनन्द से, मनवांछित फल पावे॥ जय भैरव...॥
॥ इति ॥
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